धान
धान

विभिन्न रोगों में धान से उपचार
1. अम्लपित्त :
• धान के लावा से बनने वाले सत्तू, को चीनी और पानी के साथ लेने से अम्लपित्त (एसिडिटीज) के रोग में लाभ मिलता है।
• लगभग 100-200 ग्राम धान के लावों के चूर्ण में बराबर मात्रा में चीनी मिलाकर शहद के साथ दिन में 3 बार रोगी को देने से अम्लपित्त (एसिडिटीज) के रोग में लाभ मिलता है।
2. उल्टी : 100 ग्राम धान का लावा, चीनी और शहद के मिश्रण को 18 से 28 मिलीलीटर मूंग के काढे़ के साथ दिन में 3 बार लेने से उल्टी आना बंद हो जाती है।
3. बालरोग अतिसार (बच्चों का दस्त) : 10 से 20 ग्राम धान के लावों को 7 से 14 मिलीलीटर बेल की जड़ के काढ़े के साथ दिन में 3 बार देने से बच्चों के दस्त बंद हो जाते हैं।
4. रक्तपित्त : 14 से 20 ग्राम धान के लावों को शहद के साथ दिन में 2-3 बार रोगी को देने से रक्तपित्त के रोग में लाभ मिलता है।
5. स्वरभेद (गले का बैठना) : 1 भाग चावल, 1 भाग गुड़ और 4 भाग चीनी मिलाकर दिन में 3 बार खाने से स्वरभेद (गले का बैठना) के रोग में लाभ मिलता है।
6. उर:क्षत (सीने में घाव) : 6 ग्राम धान की खील को 100 मिलीलीटर कच्चे दूध और शहद में मिलाकर पियें। 2 घंटे बाद गाय के 200 मिलीलीटर दूध में मिश्री मिलाकर पियें। इससे उर:क्षत (सीने में घाव) मिट जाता है।
विभिन्न रोगों में धान से उपचार
1. अम्लपित्त :
• धान के लावा से बनने वाले सत्तू, को चीनी और पानी के साथ लेने से अम्लपित्त (एसिडिटीज) के रोग में लाभ मिलता है।
• लगभग 100-200 ग्राम धान के लावों के चूर्ण में बराबर मात्रा में चीनी मिलाकर शहद के साथ दिन में 3 बार रोगी को देने से अम्लपित्त (एसिडिटीज) के रोग में लाभ मिलता है।
2. उल्टी : 100 ग्राम धान का लावा, चीनी और शहद के मिश्रण को 18 से 28 मिलीलीटर मूंग के काढे़ के साथ दिन में 3 बार लेने से उल्टी आना बंद हो जाती है।
3. बालरोग अतिसार (बच्चों का दस्त) : 10 से 20 ग्राम धान के लावों को 7 से 14 मिलीलीटर बेल की जड़ के काढ़े के साथ दिन में 3 बार देने से बच्चों के दस्त बंद हो जाते हैं।
4. रक्तपित्त : 14 से 20 ग्राम धान के लावों को शहद के साथ दिन में 2-3 बार रोगी को देने से रक्तपित्त के रोग में लाभ मिलता है।
5. स्वरभेद (गले का बैठना) : 1 भाग चावल, 1 भाग गुड़ और 4 भाग चीनी मिलाकर दिन में 3 बार खाने से स्वरभेद (गले का बैठना) के रोग में लाभ मिलता है।
6. उर:क्षत (सीने में घाव) : 6 ग्राम धान की खील को 100 मिलीलीटर कच्चे दूध और शहद में मिलाकर पियें। 2 घंटे बाद गाय के 200 मिलीलीटर दूध में मिश्री मिलाकर पियें। इससे उर:क्षत (सीने में घाव) मिट जाता है।
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