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इच्छा मृत्यु: सुप्रीम कोर्ट ने लगाई मुहर, राजस्थान में भी उठ चुकी है मांग, जानें किस देश में क्या है इच्छा मृत्यु का कानून


सुप्रीम कोर्ट ने लगाई मुहर, इन देशों में बन चुका है कानून, जानें इच्छा मृत्यु पर किस देश में क्या है क़ानून?
इच्छा-मृत्यु अर्थात यूथनेशिया (Euthanasia) मूलतः ग्रीक (यूनानी) शब्द है। जिसका अर्थ Eu=अच्छी, Thanatos= मृत्यु होता है। यूथेनेसिया, इच्छा-मृत्यु या मर्सी किलिंग (दया मृत्यु) पर दुनियाभर में बहस जारी है। इस पूरे मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने एक दूरगामी असर वाले फैसले में लोगों को इच्छा मृत्यु की अनुमति दे दी, कोर्ट ने कहा सम्मान से मरना मौलिक व्यक्ति का अधिकार है। इसके साथ ही पांच जजों की संविधान पीठ ने लिविंग विल की भी अनुमति दे दी। अब कोई भी व्यक्ति जिंदा रहते अपनी मौत के बारे में तय कर सकता है। लिविंग विल का मतलब अब कोई व्यक्ति यह लिखकर रख सकता है कि यदि किसी बीमारी के कारण वह ऎसी अवस्था में आ जाता है जब उसे ठीक नहीं किया जा सकता तो वह जीवन रक्षक उपकरण हटाने के लिए कह सकता है। इस मुद्दे से क़ानूनी के अलावा मेडिकल और सामाजिक पहलू भी जुड़े हुए हैं।

आपको बता दें कि राजस्थान में भी इच्छामृत्यु के मामले सामने आते रहते है। हाल ही में जयपुर की महिला विमला देवी जी के संथारे लेकर इच्छामृत्यु का मामला सामने आया था। इसके अलावा 2015 में राजस्थान के कोटपुतली जिला स्थित गाव हसनपुरा में दलित परिवार पर दबंगों के अत्याचार के मामले में रिपोर्ट दर्ज होने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं होने से नाराज लोगों ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के समक्ष इंसाफ की गुहार लगाई थी। यहां के लोग इंसाफ न मिलने से इतने हताश हो गए हैं कि उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिख कर इच्छा मृत्यु की अनुमति मांगी थी।

मेडिकल साइंस में इच्छा-मृत्यु यानी किसी की मदद से आत्महत्या और सहज मृत्यु या बिना कष्ट के मरने के व्यापक अर्थ हैं। आपको बता दें कि इच्छा मृत्यु के मामले दो तरह के होते हैं- एक निष्क्रिय इच्छा मृत्यु और दूसरी सक्रिय इच्छा मृत्यु। निष्क्रिय इच्छा मृत्यु के मामले में ऐसे व्यक्ति को उसके परिजनों की इजाज़त से मरने की छूट दी जाती है जो जीवन रक्षक प्रणाली पर अचेत अवस्था में रहता है लेकिन तकनीकी तौर पर वो जीवित होता है। कोमा में जा चुके या मृत्यु शैय्या पर पहुंच चुके लोगों को निष्क्रिय इच्छामृत्यु का हक होगा। तो वहीं सक्रिय इच्छा मृत्यु के मामले में ठीक न हो सकने वाले बीमारी की हालत में किसी मरीज को उसकी इच्छा से मृत्यु दी जाती है।

आइए जानते हैं इन देशों में किस रूप में मौजूद है इच्छा मृत्यु और क्या है कानून - 
अमरीका- यहां सक्रिय इच्छा मृत्यु ग़ैर-क़ानूनी है लेकिन ओरेगन, वॉशिंगटन और मोंटाना राज्यों में डॉक्टर की सलाह और उसकी मदद से मरने की इजाज़त है।
स्विट्ज़रलैंड- यहां ख़ुद से ज़हरीली सुई लेकर आत्महत्या करने की इजाज़त है, हालांकि इच्छा मृत्यु ग़ैर- क़ानूनी है।
नीदरलैंड्स- यहां डॉक्टरों के हाथों सक्रिय इच्छा मृत्यु और मरीज की मर्ज़ी से दी जाने वाली मृत्यु पर दंडनीय अपराध नहीं है।
बेल्जियम- यहां सितंबर 2002 से इच्छा मृत्यु वैधानिक हो चुकी है।
ब्रिटेनस्पेनफ्रांस और इटली जैसे यूरोपीय देशों सहित दुनिया के ज़्यादातर देशों में इच्छा मृत्यु ग़ैर-क़ानूनी है। नवंबर 2017 तक, नीदरलैंड, बेल्जियम, कोलंबियालक्ज़मबर्ग और कनाडा में मानव इच्छामृत्यु कानूनी है। स्विट्जरलैंडजर्मनीजापान में सहायता प्राप्त आत्महत्या कानूनी है, और वॉशिंगटन, ओरेगन, कोलोराडो, वरमोंट के अमेरिकी राज्यों में , मोंटाना, वाशिंगटन डीसी, और कैलिफोर्निया में भी कानूनी है। दक्षिण कोरिया में भी सक्रियता और निष्क्रिय दोनों इच्छामृत्यु फरवरी 2018 से शुरू होकर एक सुन्नत-कानूनी देश के रूप में शामिल होने के लिए तैयार है। विक्टोरिया के ऑस्ट्रेलियाई राज्य में एक सहायता प्राप्त मरने वाली योजना 2019 के मध्य में लागू होगी।

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